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Jaane Kahaa ??? The Revolution

अपडेट-11

 

पुर्णिमा की रात और चन्द्र की भरपुर रोशनी से भरी रात। सुनंदा, विक्रम का हाथ पकड़ के टेरेस पर भाग रही थी, सामने से एक कपल तेज़ी से नीचे उतर रहा था। दोनो आमने सामने  टकराते रह गये। विक्रम और सुनंदा ने सिढियो पे दीवार की और खिसककर उन लोगो को नीचे उतरने की जगह दी। जैसे ही वो लोग निकल गये, दोनो तेज़ी से उपर तरसे गये।

 

अब यहा किसी का डर नही था। विक्रम ने घड़ी मे देखा अभी तो रत को 945 बजे थे। कम से कम 2, 3 घंटे तो यहा वे बीता ही सकते है। दोनो ने आजूबाजू देखा, बिल्कुल अंधेरा था। लेकिन उपर पूर्णिमा का चाँद पूरा खिला हुवा था। नॅचुरल लाइट्स मौजूद था वहा। एक कोने मे अच्छी जगह देखकर विक्रम बैठ गया और पास मे सुनंदा बैठ गयी। थोड़ी देर खामोश रहकर विक्रम बोला,”क्यू क्या हुवा, आज रात को यहा आने की क्यू सूजी ?”

 

सुनंदा, ”उस रात मैं नही पाई थी क्यूकी कब मूज़े नींद लग गयी ये मूज़े पता ही नही चला था।

 

विक्रम,”लेकिन आज क्या ज़रूरत थी यहा आने की,कही अंकल उठ जाएँगे तो।

 

सुनंदा ने मुस्कुराकर कहा,” मिलिटरी बाबू जिस बात से मूज़े डरना चाहिए,वो बात आप सोच रहे हो,बिल्कुल अनाड़ी हो।

 

विक्रम हसने लगा और बोला,”बोल दे बोल दे तेरा ही ज़माना है। साला मेरी ही किस्मत खराब है,जब कुछ चाहता हू तो रुठ जाती है। और आज इल्ज़ाम भी मुज पर ही लगाती हो।

 

सुनंदा,”तो मनाया क्यू नही,मनाना आता नही और रुलाते ज़्यादा हो, किस अनाड़ी से पाला पड़ा है।

 

इतना कहकर वो उठकर चक्कर काटने लगी और बोलती रही,”हे ईश्वर मूज़े इस जंगली से बचाना। और मेरी रक्षा करना हमेशा।

 

विक्रम,”तू मूज़े जंगली क्यू कहती है,मेरा क्या दोष।

 

सुनंदा फूल मूड मे थी बोली,”जंगली ही हो,जहा लड़की देखी नही वहा दूसरा और कुछ सुजता ही नही।

 

विक्रम,”अगर तुम मर्द होती तो तुजे मालूम होता ना की हमारी मजबूरी क्या होती है?”

 

सुनंदा,”जूठे है सारे मर्द। अपने आप को कंट्रोल कर नही सकते और फिर लड़की का बहाना बनाते हो।

 

विक्रम,”अब ईश्वर ने हमे ऐसा ही बनाया है की लड़की देखकर हमसे रहा नही जाता तो फिर क्या करे बोलो।

 

सुनंदा,”जाओ जाओ, ईश्वर ने हमे भी बनाया है हम लड़कियो को तो किसी मर्द को देखकर कुछ नही होता।

 

विक्रम : मर्द के पास कुछ नही होता व्यक्त करने को और औरत को तो व्यक्त करने की ज़रूरत भी   नही होती।

 

सुनंदा,”ऐसा क्या है हम मे जो मर्द की आँखे फिसल पड़ती है।

 

विक्रम,”बोलू?” अभी वो कुछ आगे बोले इस् के पहेले सुनंदा बीच मे बोली,”बस बस में ज़्यादा सुन ना नही चाहती,कितने बेशरम हो एक लड़की के सामने ऐसी गंदी बाते क्यू बोलते हो,शर्म नही आती।

 

विक्रम,”अच्छा, अब गंदी बाते हो गयी,वहा बस मे तो ये सबकुछ दिखा रही थी,कोई उठ जाता और देख लेता तो मे तो बर्बाद हो जाता ना।

 

सुनंदा (ज़ोर से हासकर),”कमाल है, कोई मूज़े देखे और बर्बाद आप हो जाए।

 

विक्रम,”जी हा मेडम मेरी प्राइवेट प्रॉपर्टी हो तुम और तुम्हे कोई देखे,छु जाये ये मूज़े पसंद नही।

 

सुनंदा,”अच्छा अब मे आप की प्राइवेट प्रॉपर्टी? अजीब बात है।

 

विक्रम,”हा बस कुछ ही दीनो मे लाइसन्स मिलेगा और मेरी प्रॉपर्टी होने वाली है, सिर्फ़ ये ही नही ये बड़ी बड़ी आँखे,ये लंबी नाक,ये होठ,ये नजुक गला,ये..... विक्रम आगे कुछ बोले इस से पहेले सुनंदा ने दौड़कर अपने हाथ विक्रम के मूह पे रखकर उसे चुप करने की कोशिश की और विक्रम ने उस का हाथ पकड लिया।

 

 

सुनंदा (मूह पलटकर दूसरी ओर देखते हुए बोली),”हे भगवान छी……… कितनी गंदी बाते बोलते हो। एक लड़की के सामने ऐसी बाते करते हुए शरम नही आती आप को।

 

विक्रम,”इसमे शरम का हे की। ये रिश्ता तो हर कोई मर्द औरत के बीच होता ही है। वैसे पता क्या चलना सब लड़किया जानती ही है। सिर्फ़ अन्जान बन ने का नाटक करती है।

 

सुनंदा पलटकर गुस्से से विक्रम को देखा,”मैं क्या नाटक करती हू?”(एक हल्का सा तमाचा विक्रम के गालो पर पड़ता है)

 

विक्रम (अपना गाल सहलाते हुवे),”प्यार भी करना नही आता। सिर्फ़ रोना और मारना आता है। प्यार सिख़ाओ तो टूट पड़ती है मुज पर।

 

सुनंद,”मैं कब टूट पड़ी आप पर बोलिये तो।

 

विक्रम,”वहा गार्डेन मे मुज पर नही टूट पड़ी थी ? मेरे होठ जलते            थे सारी  रातभर।

 

सुनंदा ने वही एक लात लगाई विक्रम को और बोली,”जाओ, जाओ मैं नही आप टूट पड़े थे मुज पर। मेरा मूह पूरा सूज गया था कल। शायद इसीलिए थकान से मूज़े गहरी नींद गयी। जंगली की तरह मूज़े नौच रहे थे। कितनी जगह पे मूज़े काट लिया था। अभी तक तो निशान भी नही गये।

 

विक्रम ने शरारत से पुछा,”अच्छा ! दिखाओ तो जरा कहा निशान पड गये है। (कहकर सुनंदा को पकड लेता है)

सुनंदा (दूर हटकर),”मैं अच्छी तरह जानती हू देखना नही है लेकिन दूसरा निशान लगाने का इरादा है। लेकिन आज आप की दाल गलने  वाली नही है।

 

विक्रम ने फिर से पकडते हुये पुछा,”तो यहा हम क्यू आये है? खाना परोसती हो और फिर कहती हो की आज उपवास है।

 

सुनंदा फिर से लात लगाई और बोली,”मैने कहा परोसा है खुद ही भूखे शेर की तरह सब देख रहे हो। बाबा क्या करू मैं इस भूखे शेर का।

 

विक्रम,”बस् कुछ नही खाना परोस दो ना। थोड़ी भूख लगी है अब। देखो पूरे बदन मे आग लग रही है।

 

सुनंदा,”भले आग लगी हो। खुद ने आग लगाई है तो खुद ही समेट लो।

 

विक्रम ने सुनंदा को फिर से पकडकर बोला,”क्या बोली?” और आंखे मारकर इशारा किया।

 

सुनंदा ने शरमाकर बोला,”कुछ तो शरम करो बोलने मे (शर्म से लाल हो रही थी वो)

 

कुछ देर विक्रम उसे देखता रहा और सुनंदा नजरे चुराती रही अभी भी वो विक्रम के हाथो से छुट नही पायी थी की विक्रम ने उसका चेहरा अपनी और घुमाकर पुछ,”अम्मा खाना परोसती हो की खुद खा लु?”

 

सुनंदा ने मुह फेर लिया और मुस्कुराकर बोली,”बिल्कुल नही भूखे ही रहो ऐसे।

 

विक्रम ने फिर से चेहरा घुमाया,”मेडम,भूखा शेर ज़्यादा हमले करेगा फिर।

 

सुनंदा ने अपने हाथो से विक्रम का चेहरा हटाया,”मूज़े बचना आता है।और वो जटके से अपने आप को छुडाकर दुर हो गइ।

 

विक्रम (दो हाथ जोड़कर),”ओये मेडम, इतना जुल्म क्यू करती हो? यहा आग लगी            है प्लीज़।

 

सुनंदा,”आग लगाई ही क्यू? अब खुद भोगतो और मेरे सामने नही देखोगे तो ये आग नही लगेगी।

 

विक्रम,”ठीक है फिर मै खुद ही बुजा लेता हु।कहकर जैसे ही खडा हुवा की सुनंदा दो कदम पीछे हट गइ।

 

सुनंदा,”नही मूज़े मत छुना वरना मै चिल्लाउंगी।

 

विक्रम ने इशारा कीया और् धीरे से सुनंदा के कान मे कुछ बोला,”यहा हम क्यु आये है फिर?”

 

सुनदा पहले तो कुछ नही समजी लेकिन दो सेकेंड्स मे उसे बात समज मे आई की विक्रम क्या बात कर रहा है तो उसने एक थप्पड़ धीरे से विकाम को जड़ दी और धक्के मारकर उसे गिरा दिया। शर्म से लाल चेहरा हो गया और बोली,”जाओ ना कैसी गंदी बाते करते रहते हो।

 

विक्रम धीरे से उठकर खड़ा हुवा और बोला,”ठीक है तो फिर मै शुरू हो जाता हू, जो होगा उसमे मे ज़िम्मेदार नही। ये भी हो सकता है की कोई लड़की शायद पहेल करना ना चाहती हो और फिर पछताये।

 

सुनंदा,”हे ईश्वर बहुत दानत खराब है आप की।

 

इसके बाद विक्रम ने ऐसी हरकत की जिस से शरमाकर सुनंदा उठकर विक्रम से लिपट गयी और मूह उसकी छाती पे छुपा लिया और बोली,”नही मुज पर रहम करो,कितने बेरहम और बेशर्म हो।

 

विक्रम,”तो खाना दो।

 

सुनंदा,”नही बाबा, मूज़े शरम आती है।

 

विक्रम,”अच्छा मेडम परसो आधे घंटे तक लिपटी रही और यहा शरम आती है ?”

 

सुनंदा (शरम से बोली),”वहा मैं खो चुकी थी,मैं अपने आप मे नही थी।

 

विक्रम,”वो कुछ नही यहा मूज़े देती हो या मैं खुद।

 

सुनंदा (हारकर उल्टी दिशा मे दौड़कर खड़ी रही और बोली),”हे भगवान कैसे ज़िद्दी से पाला पड़ा है। मूज़े कुछ हो रहा है।

 

विक्रम,”कहा हो रहा है।

 

 

सुनंदा तिरछी निगाहो से विक्रम को देखकर बोली,”देखो अगर मे भावनाओ मे बह गयी तो ना जाने क्या कुछ हो जायेगा। आप नही जानते की आप के छु लेने से मैं कहा पहुच जाती हू फिर मैं अपने आप मे नही रहती।

 

विक्रम,”वो मैं कुछ नही जनता, तुम अगर खाना नही देती हो तो.....

 

और सुनंदा उस से फिर लिपट गयी और बोली,”नही, नही।कुछ देर वो यु ही अपना मुह छुपाती रही फिर जब विक्रम ने कुछ नही किया और कुछ नही बोला तो धीरे धीरे अपन चेहरा उठाया और विक्रम के कानो मे बोली,”वादा करो मूज़े की आप कंट्रोल मे रहोगे।

 

विक्रम ने उसे बाहो मे भरकर बोला,”ठीक है मेरी रानी जैसा तुम चाहो बस।

 

दोनो एकदुसरे के सामने देखते रहे। अब शायद चाँद को भी इंतेज़ार था उन दोनो की प्रणय लीला को देखने का। पूर्णिमा की चाँदनी रात मे पूरा उजाला हो रहा था विक्रम, सुनंदा को बाहो मे भरकर खड़ा था सुनंदा ने धीरे से आँखे उठा कर विक्रम के सामने देखा और दोनो की प्यासी निगाहे टकराई। कुछ पल विक्रम देखता रहा और फिर अचानक सुनंदा के उपर टूट पड़ा।

 

एक धक्के के साथ सुनंदा ने विक्रम को थोड़ा दूर हटाया। खुद खड़ी खड़ी हाफ़ रही थी। विक्रम थोड़ी दूर ज़ुककर खड़ा था, उसकी नज़र अपनी प्रियतमा के चेहरे पर थी लेकिन वो अब अपने आप से बाहर हो चुका था। सुनंदा को अभी नशा नही चड़ा था। सुनंदा पलटकर भाग के कोने पे दीवार पर से लिपट गयी। विक्रम ने आगे बढ़कर उसे पिछे से पकड़ लिया और उसके कंधे को छुआ सुनंदा नही नही बोलती रही लेकिन विक्रम ने उसके हाथ पिछे से अपने हाथ मे लेकर उसे बंदी बनाकर बेरहमी से चुमने लगा था। वो बिल्कुल होश मे नही रहा। सुनंदा लाचार हो गयी और उसकी धडकने तेज हो गइ थी और धीरे धीरे अपने होश खो रही थी।

 

दोनो मदहोशी मे खो रहे थे। सुनंदा के हाथ पिछे से विक्रम ने कस से पकड़ रखे थे विक्रम ने दुसरे हाथ आगे ले जा कर सुनंदा का चेहरा अपनी ओर कीया। सुनंदा का शरीर गरमी पकड़ रहा था। विक्रम धीरे धीरे जुक्ने लगा और उसके होठ कंधे से आगे उतरकर कमर पर गये। उसने सुनंदा की कमर पर बाई ओर हल्के से काट लिया। सुनंदा आहे भरने लगी। विक्रम ने एक ही ज़टके से उसे उल्टाया, अब सुनंदा पलटकर उसके सामने आइ हुई थी और विक्रम आधा ज़मीन पर बैठा हुवा था दोनो हाथ उसने सुनंदा की कमर के  अजूबाजू कस से पकड़ लिए और अपना मूह सुनंदा की कमर मे छुपा दिया।

 

अचानक विक्रम ने एक हाथ सुनंदा की पेट पर फिरकर उसकी साडी दूर करनी चाही और सुनंदा ने विक्रम का सिर पकड़ लिया और उसके बालो को नौचकर उसे अपने पेट से दूर करने की कोशिश करने लगी।

 

लेकिन विक्रम के ज़ोर के आगे उस का कोइ असर नही पडा और सुनंदा को विक्रम ने जटके से टेरेस पर सुला दिया। सुनंदा के मुह से चीख नीकल गइ। चार पांच घाव वो खा चुकी थी। कोहनी पर अभी भी सुजन थी इसिलिये वो जोर नही दे पा रही थी।

 

लेकिन अब सुनंदा को अन्दाजा रहा था की इस वक़्त उस के साथ क्या होनेवाला था। वो सहम गइ, डर गइ। सिमटना चाहती थी लेकिन उस की कोइ नही चल रही थी। क्युकि धीरे धीरे विक्रम के पैर उस पर चुके थे। एक हाथ से विक्रम ने सुनंदा के हाथ पकडे हुये थे और दुसरी हाथ से वो सुनंदा के मुह की आवाजे बन्ध कर रहा था।

 

सुनंदा के मन और शरीर दोनो के लिये बर्दाश्त के बाहर था। सुनंदा बहुत ज़ोर से कराह उठी। उसने अपनी ताक़त को समेटकर ज़ोर से विक्रम को धक्का दिया और विक्रम जो ज़मीन पर आधा बैठा था उसका संतुलन गया और नीचे बैठ गया। सुनंदा जट से खडी हुइ और दीवारो के पिछे अपने हाथ लगाकर ज़ोर से हाफने लगी। उसकी बड़ी बड़ी आँखो मे रताश चुकी थी। पूरी मदहोशी और डर के साथ मे उसकी छाती धड़क रही थी। सुनंदा को पल्लू उठाने का भी होश नही रहा था इतनी अशक्त हो रही थी। विक्रम फिर से खड़ा होकर उसके करीब आया और अपने होठ् सुनंदा के होठ् पर कस से लगा दिया।

 

और विक्रम फिर से सुनंदा पर टूट पड़ा। फिर तो उस रात सुनंदा को उस ने लडॅकी से औरत बनाकर ही छोडा।

********

किशोरीलाल ने एक जोर का तमाचा विक्रम के गालो पे लगा दिया और विक्रम उछलकर गीर पडा। उस के होठ फट गये और खुन निकल आया। पास की टीपोइ की आवाज से बंसी उपर आया और देखा की विक्रम खडा होने का प्रयास कर रहा है। अभी विक्रम की पीठ उस के आगे थी और किशोरीलाल का गुस्सा देखकर वो फिर से रुम से बाहर गया और वही खडे खडे सबकुछ सुन ने लगा. विक्रम खडा होके रोने लगा,” तु सही है दोस्त, मैने शायद बेचारी पर बलात्कार ही कर डाला था, लेकिन मै क्या करु मै अपने आप मे नही था, मुजे माफ कर दे मेरे दोस्त, माफ कर दे, इसिलिये ये बात मैने तुज से छुपाइ थी मेरे दोस्तअब वो फ़ुट् फ़ुट् के रोने लगा,”

 

क़िशोरीलाल का गुस्सा सातवे आसमान मे था उस ने पलटकर विक्रम के नाइटगाउन का कोलर पकडा और् उसे हचमचा डाला,”तुजे दोस्ती का नही, अपने बाप जैसे आदमी अंकल का नही, बल्कि मेरी बेचारी बहन पर भी नही लेकिन एक अबला लडकी पर भी रहम नही आया हरामखोर? क्या शरीर की भुख के लिये कोइ इतना कुत्ता बन जाता है की उसे सही और गलत का ध्यान भी नही रहता? वो कितनी चिल्लाइ होगी, चिखी होगी उस वक़्त जब तु उसे नौच रहा था नालायककिशोरीलाल की आंखे रौद्र स्वरुप पकड रही थी. उसकी आंखो से अनायास ही आंसु बह रहे थे। वो चिल्ला रहा था,”बेशर्म,मुजे तुजे दोस्त कह्ने मे भी शर्म रही है, जो लडकी तुजे अपना पुरा जीवन सौपने जा रही थी उसे तुने शादी से पहेली ही रौंघ डाला, तुजे उस के दर्द का थोडा सा भी एह्सास नही हुवा कमीने?”

 

और उस ने एक और तमाचा लगा दिया और विक्रम फिर दिवार पर जा गिरा। विक्रम को अन्दाजा नही था की किशोरीलाल का हाथ इतना सख्त होगा। विक्रम की आंखे लाल हो गइ और अन्धेरा छा गया। आज दिन तक उस को कभी किसी के हाथ की मार नही पडी थी। लेकिन आज वो बेबस था क्युकी आज एक भाइ अपनी इक्लौती बहन पर हुये अत्याचार का बदला ले रहा था। और वो भी एक ऐसी अभागी बहन जो अब इस दुनिया मे भी नही थी।

और विक्रम ने किशोरीलाल के पैर पकड लिय और गिड्गिडाने लगा,”मै जानता था की तुजे कितना बुरा लगेगा इसिलिये कभी तेरे पास आने की हिम्मत नही हुयी और मै यहा अपना गम भुलाने के लिये 24 घंटॆ शराब मे चुर रहा. ँएरे हथो से पाप तो हुवा था लेकिन उस से भी ज्यादा मै उस को पथ्थरो की उचाइ से नही बचा पाया और मै एक ही दिन मे अनाथ और विधुर हो गया। इस दुनिया मे अब मेरा कोइ नही है। अपनी बहन के बारे मे इतना सबकुछ जानकर कौन भाइ मुज पर रहम कर सकता है।मुजे भी तुज से रहम की कोइ उम्मीद नही थी लेकिन शायद ये मेरे प्रायश्चित है की मैने तुजे आज सबकुछ बता दिया, मेरे दोस्त, “कहकर विक्रम के गले मे शायद सुखा पड गया था।

 

किशोरीलाल को अब शायद एह्सास हो रहा था की विक्रम पर दया कर के उसने शायद गलती की थी। फिर भी उसे इतना याद रहा था की वो मन मे गांथ बांधकर आया था की उसके माता पिता और बहन की म्रुत्यु या खुन था उसका पता लगाना था और अगर विक्रम जिम्मेदार नही है तो विक्रम को दल दल से कैसे बाहर निकालना था। अब जो हो चुका था उसे वो बदल नही सकता था लेकिन अब आनेवाला समय उसे ठीक करना था। फिर उसे साधु की बात भी याद थी जिस से उसके बेटे जय का जीवन जुडा था। उस ने अपना चेहरा साफ किया उर पलटॅकर विक्रम को गले लगाया और रोती सुरत से ही कहा,”विकी, ये तुने क्या कीया?”

 

विक्रम रोते रोते बोला,”मुजे माफ कर दे मेरे दोस्त ये तो जब मुजे लगा की तुजे मुज पर शक हो रहा है और मै तेरी नजर मे और भी गीर जाउंगा इसिलिये तुजे बता ने की हिम्मत हुइ वरना मरते दम तक तुजे नही बताता। मै तुजे दुखी नही देख सकता था। मैने तो सब्कुछ खो दिया लेकिन तुज पर भाभी और बच्चे की जिम्मेदारी है इसिलिये मैने तुजे ये अब तक बताया नही था। फिर भी तुजे लगता है की अंकल और आंटी की मौत के पिछे मै जिम्मेदार हु तो मुजे काट डालना, मै कुछ भी नही बोलुंगा ये मेरा वादा है”, इतना कहकर विक्रम फुट फुट के रोने लगा। अब शायद वो तुट चुका था।

 

किशोरीलाल ने उसे उठाया और सामने  पडी कुर्सी पर बिठाया और थोडी दे बाद दोनो जब स्वस्थ हुए तब कहा,”विक्रम उस रात खा हुवा वो सबकुछ बता मुजे, मै अपनी बहन की आखरी रात का पुरा हाल सुन ना चाहता हु.

 

बताता हु, सबकुछ बताता हु मेरे दोस्त, पुरी कहानी तो बता चुका हु सिर्फ उसके दर्द का हाल सुनाना बाकी रह गया है.इतना कहकर विक्रम थोडी देर चुप रहा और फिर आगे बोलना शुरु किया......

*******

 

 

सुनंदा बेहोश पडी थी। विक्रम को कुछ देर लगी अपने मिजाज को ठिकाने पर लाते हुये और उस ने देखा की सुनंदा बेहोशी मे भी तडप रही थी। उसके होठ पर काटने के निशान थे,आँखो मे आँसू, सुनंदा की साडी पता नही किस कोने मे पड़ी थी। शरीर पर निशान पड चुके थे बाकी के कपडो मे खुन के धब्बे पड चुके थे।

 

विक्रम को अब होश आया की उस ने क्या कर दिया था। उस ने सुनंदा को जल्दी से साडी ओढाइ और उस के चेहरे को अपने हाथ मे लेकर जगाने लगा। सुनंदा ने कुछ देर बाद आंखे खोली और खुल्ले मुह से रोने लगी।

 

मानसिक तौर पे तो वो दो दिन से टुट ही रही थी लेकिन अब वो शरीर से भी टूट चुकी थी। विक्रम ने उसे बाहो मे ले लिया। सुनंदा के सब्र का बाँध तुट गया। थोड़ी देर तक विक्रम उसकी पीठ पर सहलाता रहा। लेकिन अब उसे पता था की उसका हाथ दवा का नही लेकिन दर्द का काम करेगा। शायद ही सुनंदा के बदन मे कोई जगह हो जहा उसे छाले नज़र ना रहे हो। वो माफी मांगने लगा था।

 

थोड़ी देर सुनंदा दिवारो से मुह छुपाकर सिसकारियो से खुद रोइ और जब  विक्रम उसके करीब अपना मुह ले गया और सुनंदा खुल्ले मुह से रो पडी। उसमे शायद खडे रहेने की या रोने की ताक़त भी नही रही थी। विक्रम उसे बाहो मे लेकर बैठ गया और उसने उसका चेहरा अपनी और कीया। सुनंदा का सुंदर चेहरा बिल्कुल बिखर् चुका था। विक्रम सिर्फ इतना बोल पाया,”आइ एम् आम सॉरी सुनंदा, ये क्या हो गया मुज से।

 

सुनंदा धीरे धीरे बोल उठी,“आप... ने.. मे..मे..री एक नही..ही.. मानी। .....हती थी ना की .... बिल्कुल जा...जा..नवर है और दे...दे..देखिये अखिर आज... आपने मूज़े ....नौच ही डाला।थोड़ी देर चुप रहने के बाद वो फिर बोली,“....शायद मुज मे ही ता..ता...क़त कम पड गयी की ....मैं आप को सहन ना ....कर सकी।उस से बोला भी नही जा रहा था।

 

विक्रम की आँखो से अब आँसू की धारा निकल आई,“नही सुनंदा ऐसा मत बोलो, मैं तुम से बहुत प्यार करता हू, बस.. मे.. मैं..बहक गया था। शायद उस गार्डेन की वजह से ही इतना बाहर हो गया की तुजे इतना घायल कर बैठा की जिसे लोग बलात्कार कहते है।

 

सुनंदा ऐसे दर्द मे भे हस पड़ी,“आप बिल्कुल ठीक बोल रहे हो। अगर ये प्यार का, पति पत्नी के साथ् का प्यार का यही तरीका है तो जिस लड़की पर अत्याचार हुवा हो उसकी हालत कैसी होती होगी।और फिर से हस पड़ी। लेकिन मैं आप से बिल्कुल नाराज़ नही हू। परसो गार्डेन की रात के बाद जो गुस्सा, नफ़रत मैने आप मे देखी है उस से ये प्यार का तरीका अच्छा है। क्यूकी अभी मैं सिर्फ़ शरीर से थोडी थक गयी हू लेकिन परसो उस  वक़्त मै...मै..मेरे जख्म भर आये थे। ये जख्म तो दो दिन मे भर जाएँगे लेकिन अगर आप नफ़रत करते तो शायद मैं सहन नही कर पाती।

 

मुज से इतना प्यार ना करो सुनंदा इतना प्यार ना करो, मैं तेरे इतने प्यार के काबिल नही हू, अगर होता तो कम से कम थोडा दिमाग से जरुर सोचता। तु बिल्कुल ठीक कहती थी की मैं जंगली जानवर हू। मैने तुजे नौच डाला है, मैने तुज् पर अत्याचार किये है।विक्रम अब रो रहा था।

 

असहाय मे भी सुनंदा बोली,”आप क्यू रो रहे हो, अभी तो सिर्फ़ मूज़े दर्द हो रहा है। पहले हम दोनो को दर्द हो रहा था और वो भी मेरी वजह से अब अगर अपना शरीर आप के सामने रखना पडा तो दुबारा भी रख दूँगी।फिर हस कर बोली,”हा मूज़े काटना कम, मुज मे शायद आप को सहन करने की कम ताक़त है, लेकिन मैं सबकुछ ठीक कर दूँगी, आप मुज से नाराज़ ना होना। मुज से आप की नफरत सहन नही होती।

 

विक्रम उसे गले लगाकर माफी मांगने लगा लेकिन सुनंदा धीरे से हसकर बोली,”अब तो आज आप से प्यार भी नही कर सकती। क्या आज की रात के लिए मूज़े माफ़ कर सकते हो ?” उसने हाथ जोड़कर कहा। उसके चेहरे पर दर्द देखकर विक्रम ने उसे और थोड़ी देर वो देखता रहा और बोला,”कैसा दर्द हो रहा है, मुजे सच सच बता वरना मेरा मरा हुवा मुह देखेगी।

 

 

सुनंदा की आँखे रो उठी कुछ पल उस ने चेहरा पलट लिया, लेकिन वो कुछ करने मे असमर्थ थी उसने अपने चेहरे पर आँखे, होठ, गाल पे इशारा किया। विक्रम ने पुछा,”और?” सुनंदा ने अपनी छाती पर इशारा किया,और कमर के नीचे इशारा करते हुए बोली,”शायद बहुत खुन बह गया है। इतना तो मूज़े उन दिनो मे………कहकर बात आधी रख दी। विक्रम समज गया की वो क्या कहना चाह्ती थी। 

 

सुनंदा फिर आगे बोली,”मूज़े पता ही नही था की आप ऐसा करोगे, इसीलिए मैं बिल्कुल तैयार नही थी। मूज़े जब कुछ महसूस हुवा तो मुज से सहन नही हुवा मैने आप को हटाने की बहुत कोशिश की लेकिन मर्द हो ना आख़िर मे वो इतना गहरा दर्द हुवा की मूज़े अभी भी थोड़ी थोड़ी देर मे दर्द के ज़टके रहे है। इसीलिए मैं हाथ दबा के दर्द सहन करने की कोशिश कर रही हू।

 

विक्रम ने देखा रात के 12 बज चुके थे और उसने सुनंदा को फिर से गले लगाया और बोला,“चलो रूम मे जाकर फ्रेश हो ता की अंकल तुजे इस हालत मे ना देख पाये वरना हम क्या मूह      दिखायेंगे उस को।

 

सुनंदा स्वस्थ होने की कोशिश करते हुये हस पड़ी,“मैं उसे कहुंगी की आप के जमाइबाबु बहुत तेज है। सब्र का ज्ञान बिल्कुल नही है और जो मिलनेवाला होता है उसे छिन ने मे उसे मजा आता है। देखो मुज पर कैसे महेरबानी कर डाली है।

 

फिर अचानक वो गभरकार बोली,“आप मुज् से जल्दी शादी तो करेंगे न।

 

विक्रम बोला,“अरे पगली मान ले आज से ही तु मेरी पत्नी।, कहकर उसने अपने हाथ की कोहनी ज़ोर से दीवार पर घीस् डाली, इस की वजह से खुन की तीन चार बुन्दे उसके कोहनी मे पड गयी। वो खुन् अपने अंगुठे पे लेकर उसने सुनंदा की मांग भर डाली और बोला,“आज से अभी से इस चान्दनी मे चन्द्रमा की साक्षी मे की मैं तुजे अपनी बीवी बनाता हू। कहकर उसने सुनंदा को अपनी बाहो मे भर लिया और धीरे से कान मे बोला,मेडम सुहागरात् अभी मनाये या बाद मे ?

 

सुनंदा के जिस्म मे ताक़त बिल्कुल नही थी लेकिन ज़त से वो विक्रम से अलग हुई और एक लात उसने विक्रम को लगा दी। और बोली,आप के शादी का अपनी पत्नी की और से यह तोहफा। अभी भी थके नही हो जानवर कही के। आदमी हो या मुसीबत ?

 

विक्रम के मूह से चीख निकल गयी और उसने सुनंदा को फिर से गले लगा लिया और दोनो धीरे धीरे से नीची उतरने लगे।

लेकिन ये उन दोनो प्रेमीयो की रतीक्रिया कहो या सुहागरात, खुशिया कहो या जीन्दगीभर का प्यार बस वोही पल समाप्त हो चुका था। क्युकी आनेवाले पाचवे घंटे मे सुनंदा की लाश गीरनेवाली थी और यह बात उन दोनो को भी पता नही था

उस रात एक और घटना हुई थी जिस पर दोनो मे से किसी का ध्यान नही पड़ा था। और ये घटना आनेवाले समय पर कब और जाने कहा ??? भारी थी ये तो शायद कुदरत ही जानती थी……

                                                *************************

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10 Comments

PHOENIX

05-Jan-2022 01:11 PM

Thanks for reply.

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Alfia alima

05-Jan-2022 12:48 PM

sunder

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Sandhya Prakash

02-Jan-2022 11:23 AM

Oh my god, sunanda kitana taklif me hogi. 😤🤥

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PHOENIX

02-Jan-2022 11:51 AM

हा, वो मरनेवाली जो है।

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